विदिशा जिले की ग्राम पंचायत पठारी में रहने वाले अमित रजक के लिए महीने की तय तारीख पर आने वाली पेंशन राशि अब घर का हिसाब संभालने का सबसे भरोसेमंद आधार बन गई है। दिव्यांगता के कारण रोजमर्रा के कामों में उन्हें कई तरह की दिक्कतें आती रही हैं और नियमित आय के साधन सीमित थे। दिव्यांगजन पेंशन योजना का लाभ मिलने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। उनकी यह कहानी सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जिला प्रशासन की ओर से साझा की गई है।

पहले क्या कठिनाई थी, इसे अमित रजक के हवाले से बताया गया है। सीमित आमदनी में परिवार की आवश्यकताएं पूरी करना मुश्किल हो जाता था। इलाज, आने-जाने और घर के छोटे-छोटे खर्चों के लिए भी दूसरों पर निर्भरता बनी रहती थी।

खास बातें

  • विदिशा जिले की ग्राम पंचायत पठारी निवासी अमित रजक को दिव्यांगजन पेंशन योजना का लाभ मिल रहा है।
  • नियमित पेंशन राशि से दैनिक जरूरतें और अन्य खर्च संभालना आसान हुआ, ऐसा हितग्राही का कहना है।
  • यह कहानी सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सामने आई सफलता की कहानियों में शामिल है।

नियमित राशि ने बदला घर का हिसाब

योजना के तहत पेंशन राशि नियमित रूप से मिलने लगी, जिससे खर्चों की योजना पहले से बनाना संभव हो गया। हितग्राही के मुताबिक अब वे दैनिक जरूरतों के साथ-साथ दूसरे खर्चों का प्रबंधन भी बेहतर तरीके से कर पा रहे हैं। किसी परिवार के लिए तय समय पर आने वाली छोटी राशि भी तब बड़ा फर्क डालती है, जब आय का कोई और स्थिर स्रोत न हो।

अमित रजक का कहना है कि इस सहयोग ने उनके जीवन को अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक बनाया है। उनके अनुसार आर्थिक सहायता मिलने से जीवन की कठिनाइयों का सामना करने में काफी मदद मिल रही है। उन्होंने यह भी बताया कि इससे उनमें आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की भावना बढ़ी है।

सम्मान के साथ जीने का अवसर

दिव्यांगजन पेंशन योजना का मकसद जरूरतमंद और दिव्यांग नागरिकों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर देना है। जिला प्रशासन की ओर से जारी विवरण में कहा गया है कि यह योजना ऐसे नागरिकों के जीवन में आशा और आत्मविश्वास का संचार कर रही है। अमित रजक ने योजना का लाभ मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया है।

ध्यान देने की बात यह है कि यह विवरण एक हितग्राही के अनुभव पर आधारित है, इसमें पेंशन की राशि या भुगतान की अवधि का उल्लेख नहीं किया गया है। योजना से जुड़ी पात्रता, आवेदन और राशि की जानकारी के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जनपद पंचायत तथा ग्राम पंचायत स्तर पर संपर्क किया जा सकता है। दिव्यांगता प्रमाण-पत्र और संबंधित दस्तावेज आवेदन प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं।

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जिले में योजनाओं के लाभ से जुड़ी ऐसी कहानियां समय-समय पर सामने रखी जा रही हैं। पठारी का यह मामला बताता है कि पेंशन जैसी सतत सहायता का असर सिर्फ आंकड़ों में नहीं, बल्कि एक परिवार की रोजमर्रा की सहूलियत में दिखता है।