राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम ( RBSK) के अंतर्गत समय पर की गई पहचान, उचित रेफरल और निरंतर उपचार से लटेरी की 5 वर्ष 8 माह की बालिका स्वरागिनी के जीवन में नई उम्मीद और खुशियों की आवाज लौटी है। कभी सुनने में परेशानी के कारण बोलने और भाषा के विकास में कठिनाई का सामना कर रही स्वरागिनी आज आवाजों को सुनने के साथ-साथ बोलने लगी है।

स्वरागिनी, पिता श्री गोपाल प्रजापति, निवासी लटेरी, जिला विदिशा की रहने वाली है। बचपन से ही उसे सुनने में परेशानी थी। इस कारण उसके बोलने तथा भाषा संबंधी विकास पर भी प्रभाव पड़ रहा था। परिवार के लिए यह चिंता का विषय था, लेकिन राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत हुए स्वास्थ्य परीक्षण ने स्वरागिनी के जीवन में बदलाव की राह खोल दी।

RBSK जांच में हुई समस्या की पहचान -

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम ( RBSK) की टीम द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान स्वरागिनी में श्रवण संबंधी समस्या की पहचान की गई। टीम ने समस्या को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक जांच एवं उपचार के लिए बच्ची को जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र ( DEIC), विदिशा रेफर किया। DEIC, विदिशा में विशेषज्ञों द्वारा स्वरागिनी का परीक्षण एवं आवश्यक मूल्यांकन किया गया। जांच के आधार पर बेहतर एवं विशेषज्ञ उपचार के लिए उसे उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया गया।

कॉक्लियर इम्प्लांट से मिली सुनने की क्षमता -

उच्च चिकित्सा केंद्र पर आवश्यक जांच एवं विशेषज्ञों के मूल्यांकन के बाद स्वरागिनी के लिए कॉक्लियर इम्प्लांट की आवश्यकता निर्धारित की गई। इसके बाद 21 जनवरी 2024 को स्वरागिनी का सफलतापूर्वक कॉक्लियर इम्प्लांट किया गया।

ऑपरेशन के बाद उपचार की प्रक्रिया यहीं समाप्त नहीं हुई। बच्ची को लगभग एक वर्ष तक नियमित रूप से स्पीच एवं हियरिंग थेरेपी दी गई। परिवार ने भी उपचार प्रक्रिया में निरंतर सहयोग किया और बच्ची को नियमित रूप से थेरेपी के लिए ले जाया गया।

निरंतर उपचार, नियमित स्पीच एवं हियरिंग थेरेपी और परिवार के सहयोग से स्वरागिनी में धीरे-धीरे सुनने एवं बोलने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ। आज वह आवाजों को सुनने के साथ-साथ बोलने लगी है। जिस बच्ची के लिए कभी दुनिया की आवाजों को सुनना और अपनी बात कहना चुनौती था, वही स्वरागिनी अब अपनी आवाज के माध्यम से अपनी भावनाएं और खुशियां व्यक्त कर रही है। उसके जीवन में आया यह बदलाव उसके परिवार के लिए भी खुशी और संतोष का विषय है।

समय पर पहचान बनी बदलाव की वजह -

स्वरागिनी की सफलता इस बात का उदाहरण है कि बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान, उचित रेफरल, विशेषज्ञ उपचार और निरंतर फॉलोअप कितना महत्वपूर्ण है। RBSK टीम द्वारा समय पर श्रवण समस्या की पहचान, DEIC विदिशा द्वारा उचित मार्गदर्शन एवं रेफरल, उच्च चिकित्सा केंद्र पर उपलब्ध उपचार तथा परिवार के निरंतर सहयोग ने स्वरागिनी के जीवन को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

स्वरागिनी की कहानी अन्य अभिभावकों के लिए भी संदेश है कि यदि बच्चे में सुनने, बोलने, देखने, चलने या विकास से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या दिखाई दे, तो उसे नजरअंदाज न करें। समय पर स्वास्थ्य परीक्षण एवं विशेषज्ञों की सलाह लेकर उपचार कराया जाए तो बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव संभव है।