सिरोंज के आजीविका भवन में शुक्रवार को हुए उद्यम संवाद कार्यक्रम की सबसे बड़ी बात कोई घोषणा नहीं, बल्कि आठवीं तक पढ़ी लीलाबाई जाटव का हिसाब था। स्वसहायता समूह से जुड़कर उन्होंने घर से ही एक छोटी किराना दुकान शुरू की, फिर सीसीएल ऋण लेकर उसका विस्तार किया। आज वह एक बड़ी किराना दुकान चलाने के साथ सिलाई का काम भी करती हैं और दोनों से हर महीने करीब 20 से 22 हजार रुपये कमा रही हैं।
मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत हुए इस कार्यक्रम में कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने सिरोंज तहसील के उद्यमियों, युवाओं, महिलाओं और स्वसहायता समूहों के सदस्यों से सीधे बातचीत की। उन्होंने सफल उद्यमियों से पूछा कि कारोबार कैसे शुरू किया, रास्ते में कौन सी दिक्कतें आईं और उन्हें कैसे पार किया।
खास बातें
- लीलाबाई जाटव ने समूह से जुड़कर किराना दुकान और सिलाई से 20-22 हजार रुपये मासिक आय हासिल की।
- रामबाई जाटव ने 10 हजार से 2 लाख तक के ऋण लेकर मुर्गी-बकरी पालन और किराना दुकान खड़ी की।
- कार्यक्रम में उद्यम क्रांति, पीएम विश्वकर्मा, मुद्रा समेत कई योजनाओं की पात्रता और आवेदन प्रक्रिया समझाई गई।
10 हजार के पहले ऋण से 2 लाख तक का सफर
ग्राम चौड़ा खेड़ी की रामबाई जाटव ने बताया कि एक समय उनके पास आय का कोई स्थायी साधन नहीं था। स्वसहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने क्रमशः 10 हजार, 20 हजार, 50 हजार, एक लाख और फिर दो लाख रुपये तक के ऋण लिए। इस पैसे से उन्होंने मुर्गी पालन, बकरी पालन और किराना दुकान का काम खड़ा किया, जो आज भी चल रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि खुद आगे बढ़ने के साथ-साथ उन्होंने दूसरी महिलाओं को भी समूह से जोड़ा। उनके मुताबिक समूह और ऋण सुविधा ने ही उन्हें आर्थिक रूप से अपने पैरों पर खड़े होने का मौका दिया और अब वह परिवार के खर्चों में बड़ा योगदान दे रही हैं।
पीएम स्वनिधि योजना के हितग्राही कपिल रजक ने अपना अनुभव सुनाया। उन्होंने घर पर ही इलेक्ट्रिशियन के काम की छोटी दुकान से शुरुआत की थी। पहले 10 हजार रुपये का ऋण लिया, समय पर चुकाया तो 20 हजार मिले, वह भी चुका दिया और अब उन्होंने 50 हजार रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया है।
कलेक्टर ने कहा - रोजगार देने वाले बनें
कलेक्टर श्री गुप्ता ने युवाओं और महिलाओं से कहा कि वे इन अनुभवों से प्रेरणा लेकर अपनी रुचि, क्षमता और स्थानीय जरूरत के हिसाब से अपना कारोबार खड़ा करने की दिशा में बढ़ें। उन्होंने कहा कि शासन अलग-अलग वर्गों के लिए कई स्वरोजगार और आर्थिक कल्याण योजनाएं चला रहा है, जिनका लाभ लेकर वे खुद के साथ दूसरों के लिए भी रोजगार बना सकते हैं।
उनका कहना था कि जरूरत इस बात की है कि युवा अपनी रुचि और क्षमता पहचानें, उपलब्ध अवसरों का इस्तेमाल करें और रोजगार मांगने वाले के बजाय रोजगार देने वाले बनने की तरफ कदम बढ़ाएं। सफल उद्यमी सोनू मालवीय, अशोक शर्मा, अंकुर जैन, रामकली प्रजापति और कौशल्या शाक्य ने भी अपने कारोबार की शुरुआत से लेकर उसे बढ़ाने तक का अनुभव साझा किया।
किस योजना में क्या मिलेगा, मौके पर समझाया गया
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, संत रविदास योजना, भगवान बिरसा मुंडा योजना, टंट्या मामा आर्थिक कल्याण योजना, डॉ. भीमराव अंबेडकर आर्थिक कल्याण योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, पशुपालन विभाग की स्वरोजगार योजनाओं और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने पात्रता के मापदंड, आवेदन की प्रक्रिया तथा ऋण और अनुदान से जुड़े प्रावधान भी बताए।
संवाद के दौरान उद्यमियों ने कारोबार चलाने से जुड़ी अपनी दिक्कतें अधिकारियों के सामने रखीं और कई मामलों का निराकरण मौके पर ही किया गया। लंबित कार्यवाही जल्द पूरी करने के निर्देश भी दिए गए। सिरोंज क्षेत्र के जो युवा या महिलाएं इन योजनाओं में आवेदन करना चाहते हैं, वे अपनी जरूरत के मुताबिक संबंधित विभाग से सीधे संपर्क कर सकते हैं।
कार्यक्रम में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सिरोंज, नगरपालिका अध्यक्ष श्री मनमोहन साहू, जनप्रतिनिधि और विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
