पांढुर्णा कलेक्टर कार्यालय ने अनुकंपा नियुक्ति के लंबित प्रकरणों का निराकरण करते हुए तीन आवेदकों को सहायक श्रेणी-3 के पद पर नियुक्ति दे दी है। कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ ने इस संबंध में नियुक्ति आदेश जारी कर दिए हैं। तीनों की पदस्थापना कलेक्टर कार्यालय, जिला पांढुर्णा में की गई है।
यह कार्रवाई मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अनुकंपा नियुक्ति संबंधी निर्देशों के तहत हुई है। प्राप्त आवेदनों का जिला स्तरीय समिति ने परीक्षण किया और अनुशंसा दी। परीक्षण में पात्र पाए गए आवेदकों को ही नियुक्ति दी गई है।
खास बातें
- तीन आवेदकों को कलेक्टर कार्यालय पांढुर्णा में सहायक श्रेणी-3 के पद पर नियुक्ति
- जिला स्तरीय समिति के परीक्षण और अनुशंसा के बाद प्रकरणों का निराकरण
- आदेश जारी होने की तारीख से 15 दिन में कार्यभार ग्रहण करना अनिवार्य
किन्हें मिली नियुक्ति
जारी आदेश के अनुसार सुकलूढाना वार्ड क्रमांक 18, जिला छिंदवाड़ा के निवासी श्री रविकुमार, पिता स्व. ईश्वरदयाल साहू को नियुक्ति दी गई है। दूसरे चयनित श्री अमन, पिता स्व. धर्मेन्द्र टवेंकर हैं, जो तहसील मोहखेड़ के उमरानाला के रहने वाले हैं।
तीसरी नियुक्ति पांढुर्णा के जलाराम वार्ड निवासी श्री शुभम, पिता स्व. रूपचंद रबड़े को मिली है। तीनों को सहायक श्रेणी-3 के पद पर रखा गया है। यह पद कार्यालयीन कामकाज से जुड़ा सहायक संवर्ग का पद है।
वेतनमान और परिवीक्षा की शर्त
नियुक्ति शासन द्वारा निर्धारित वेतनमान और नियमों के अधीन की गई है। यह सीधे स्थायी नियुक्ति नहीं है — तीनों को तीन वर्ष की परिवीक्षा अवधि से गुजरना होगा। इस अवधि में नियुक्ति आदेश में तय शर्तों और नियमों का पालन अनिवार्य रखा गया है।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि चरित्र सत्यापन में यदि कोई अभ्यर्थी शासकीय सेवा के लिए अपात्र पाया जाता है, तो अनुकंपा नियुक्ति समाप्त की जा सकेगी। नियुक्ति संबंधी शर्तों के उल्लंघन पर भी यही प्रावधान लागू होगा।
आगे क्या करना होगा
चयनित अभ्यर्थियों को आदेश जारी होने की तिथि से 15 दिन के भीतर कार्यभार ग्रहण करना अनिवार्य है। कार्यभार ग्रहण करने से पहले जिला मेडिकल बोर्ड से स्वास्थ्य परीक्षण कराना होगा। इसके साथ चरित्र प्रमाण-पत्र और शैक्षणिक योग्यता के मूल प्रमाण-पत्र सहित निर्धारित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
जिन परिवारों के अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन अभी विचाराधीन हैं, उनके लिए यह प्रक्रिया एक संकेत है कि प्रकरण जिला स्तरीय समिति के परीक्षण और अनुशंसा के रास्ते से ही निपटाए जा रहे हैं। दस्तावेज पूरे रखना और तय समय-सीमा का ध्यान रखना इसमें सबसे अहम है।


